कैनसस, जुलाई 1875। पाँच बरस तक चिट्ठियों के सहारे जीने के बाद, अध्यापिका एडा कॉर्बेट मवेशियों के क़स्बे गिलियड में बग्घी से उतरती है। उसके पास वह ज़मीन की रसीद है जो उसके पति विल ने उसे डाक से भेजी थी। पर विल उसे लेने नहीं आया। क़स्बा यही चाहता है कि वह वापस बग्घी में बैठ जाए और भूल जाए कि वह यहाँ क्यों आई थी। सरहद पर ज़िंदगी बसाने और अपनी ज़मीन पर डटे रहने की एक क्लासिक वेस्टर्न कहानी।
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कैनसस, जुलाई 1875। पाँच बरस तक चिट्ठियों के सहारे जीने के बाद, अध्यापिका एडा कॉर्बेट मवेशियों के क़स्बे गिलियड में बग्घी से उतरती है। उसके पास वह ज़मीन की रसीद है जो उसके पति विल ने उसे डाक से भेजी थी। पर विल उसे लेने नहीं आया। क़स्बा यही चाहता है कि वह वापस बग्घी में बैठ जाए और भूल जाए कि वह यहाँ क्यों आई थी। सरहद पर ज़िंदगी बसाने और अपनी ज़मीन पर डटे रहने की एक क्लासिक वेस्टर्न कहानी।