ओब्रेविल, 1280। सौ बरस से यह शहर अपना गिरजाघर बना रहा है, और किसी राजमिस्त्री ने अब तक उसका शिखर नहीं देखा। राजमिस्त्रियों की गिल्ड में पला अनाथ आंसेल बस अपनी कारीगरी का निशान पाना चाहता है। अपनी परीक्षा की सुबह उसे पहले उस्ताद जेर्वे का छिपा निशान ढूँढने भेजा जाता है—वही जेर्वे, जिसे सौ साल पहले पागल कहकर निकाल दिया गया था, और जिसका निशान तब से कोई शागिर्द नहीं ढूँढ पाया। बुरादे, शराब और पत्थर से भरी एक गर्मजोशी भरी, चुटीली मध्ययुगीन रहस्य-कथा।
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ओब्रेविल, 1280। सौ बरस से यह शहर अपना गिरजाघर बना रहा है, और किसी राजमिस्त्री ने अब तक उसका शिखर नहीं देखा। राजमिस्त्रियों की गिल्ड में पला अनाथ आंसेल बस अपनी कारीगरी का निशान पाना चाहता है। अपनी परीक्षा की सुबह उसे पहले उस्ताद जेर्वे का छिपा निशान ढूँढने भेजा जाता है—वही जेर्वे, जिसे सौ साल पहले पागल कहकर निकाल दिया गया था, और जिसका निशान तब से कोई शागिर्द नहीं ढूँढ पाया। बुरादे, शराब और पत्थर से भरी एक गर्मजोशी भरी, चुटीली मध्ययुगीन रहस्य-कथा।